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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 2, ISSUE 4 (2016)
प्रवासी हिन्दी साहित्य लेखन के विविघ आयाम
Authors
सोनिया राठी
Abstract
प्रवासी भारतीय जो संवेदनशील थे, उन्होंने विदेश में अपने प्रवास के दौरान आने वाली समस्याओं को, अपने आस-पास घटित घटनाओं को अपनी कलम के माध्यम से साहित्य द्वारा उजागर किया। अपने विचारों, अपनी सोच, दृष्टिकोण, चिंतन, व मान्यताओं द्वारा लेखन कार्य प्रारम्भ किया। अपने सामाजिक परिवेश से व परिस्थितियों से प्रभावित हो कर अलग-अलग विषयों में साहित्य की रचना की। यहीं से ‘प्रवासी हिन्दी साहित्य’ का ‘श्री गणेश’ हुआ।
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Pages:38-40
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सोनिया राठी "प्रवासी हिन्दी साहित्य लेखन के विविघ आयाम". International Journal of Hindi Research, Vol 2, Issue 4, 2016, Pages 38-40
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