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VOL. 12, ISSUE 2 (2026) — Apr-Jun
| S.No. | Title and Authors Name |
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| 1 | दक्षिण भारत में हिन्दी का स्थानमान Authors: जयनागेश एनएम Pages:1-4 |
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| 11 | टूटते रिश्तों के बीच बिखरता बचपन: आपका बंटी का मनोवैज्ञानिक एवं साहित्यिक विश्लेषण Authors: M d Imtiyaz Pages:32-37 |
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| 43 | एनीमिया जागरूकता जन-आंदोलन : इंदौर मॉडल का राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में मूल्यांकन (सामुदायिक स्वास्थ्य, जनभागीदारी एवं होम्योपैथिक दृष्टिकोण पर आधारित शोध-पत्र) Authors: डॉ. ए. के. द्विवेदी Pages:144-146 |
| 44 | आधुनिक समय में ख्याल लोकनाट्य के संरक्षण की चुनौतियाँ कुचामनी ख्याल के विशेष संदर्भ में Authors: राम कुमार, डॉ. रेहाना बेग़म Pages:147-150 |
| 45 | भगवतीचरण वर्मा के ‘चित्रलेखा’ में पाप, पुण्य और प्रेम की अवधारणा का पुनर्पाठ Authors: दिनेश, डॉ. कल्पना Pages:151-153 |
| 46 | हिन्दी के प्रमुख ललित निबंधकारों के निबंधों का लोकतात्त्विक अध्ययन: परंपरा और समकालीन सरोकार Authors: विमल कुमार मीना, डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंघवी Pages:154-155 |
| 47 | हिंदी कहानियों का शिल्प और पर्यावरणीय संवेदना: मानव-प्रकृति संबंध की सतत व्याख्या Authors: श्वेता पारीक , निर्मला राव Pages:156-158 |
| 48 | विकास का मिथक और जन-विस्थापन व शोषण का यथार्थ: ‘डूब’ उपन्यास के संदर्भ में Authors: जीतबाला Pages:159-161 |
| 49 | फणिश्वरनाथ रेणु के उपन्यास ‘ मैला आँचल ’ में आंचलिकता Authors: उमा बणिचुल Pages:162-163 |
| 50 | सुरेंद्र वर्मा के नाटकों का रंगमंचीय अध्ययन Authors: सौरभ कुमार शर्मा, ओमप्रकाश द्विवेदी Pages:164-166 |
| 51 | महाभारत के पुरुष पात्रों के स्त्री-विषयक मनोविज्ञान की समकालीन प्रासंगिकता (नरेंद्र कोहली कृत महासमर उपन्यास के विशिष्ट संदर्भ में) Authors: तरुण किशोर नौटियाल Pages:167-170 |
| 52 | प्रेमचंद की कफन में अमानवीय गरीबी का चित्रण Authors: Dr. D Ananthalakshmi Pages:171-173 |
| 53 | आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के ललित निबंधों में सामयिक-बोध Authors: धीरज कुमार सोनी Pages:174-175 |
| 54 | ग्रामीण कृषि श्रमिकों की मौसमी रोजगार सरंचना (उत्तर प्रदेष के जौनपुर जिले के विषेष संदर्भ में) Authors: सुश्मिता सिंह, मृदुला मिश्रा Pages:176-179 |
| 55 | वैश्वीकरण और सांस्कृतिक संकट के संदर्भ में रामचरितमानस की प्रासंगिकता Authors: डॉ. राखी सोराठिया Pages:180-183 |
| 56 | मुगलकालीन महिलाओं का तत्कालीन समाज एवं संस्कृति के विकास में योगदान Authors: डॉ. हेमा तिवारी Pages:184-186 |
| 57 | ओड़िआ वैष्णव साहित्य में निर्गुणवादी चेतना Authors: विष्णुप्रिया भुक्ता, डॉ स्नेहलता दास Pages:187-189 |
| 58 | पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी की उसने कहा था में उदात्त प्रेम Authors: Dr. D Ananthalakshmi Pages:190-193 |
| 59 | ममता कालिया के उपन्यासों में स्त्री जीवन का चित्रण Authors: चंदा कुमारी Pages:194-200 |
| 60 | मन्नू भंडारी की कहानी ‘यही सच है’ में स्त्री-मन, प्रेम और आत्मचेतना का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण Authors: डॉ. नंदिनी चौबे Pages:201-203 |
| 61 | गिर्दा के जनगीत ‘जैंता एक दिन तो आलो’ में उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, सांस्कृतिक स्मृति और सामाजिक परिवर्तन की चेतना Authors: डॉ. निधि उप्रेती Pages:204-206 |
| 62 | शिक्षक-प्रशिक्षुओं में भावनात्मक बुद्धिमत्ता एवं मनोवैज्ञानिक अनुकूलन का अन्तर्संबंध: एक अधि-संश्लेषणात्मक अध्ययन Authors: ममता सिंह, डॉ. ममता व्यास Pages:207-211 |
| 63 | बौद्ध दर्शन में नारी की स्थिति: एक आलोचनात्मक विमर्श Authors: दमयंती बाई Pages:212-215 |
| 64 | कमल कुमार के कथा-साहित्य में स्त्री-विमर्श और समकालीन सामाजिक यथार्थ Authors: हरिस्वरूप, डॉ. मीनेश जैन Pages:216-219 |
| 65 | विश्वेश्वरप्रसाद कोइराला के उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ और सांस्कृतिक परिदृश्य का अध्ययन Authors: मौसमी सिंह तिवारी Pages:220-223 |
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