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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
ममता कालिया के उपन्यासों में स्त्री जीवन का चित्रण
Authors
चंदा कुमारी
Abstract
ममता कालिया समकालीन हिन्दी साहित्य की प्रमुख कथाकारों में से एक हैं, जिन्होंने अपने उपन्यासों के माध्यम से भारतीय समाज, विशेषतः मध्यवर्गीय स्त्री जीवन की जटिलताओं, संघर्षों एवं यथार्थ को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। प्रस्तुत शोध-पत्र “ममता कालिया के उपन्यासों में स्त्री जीवन का चित्रण” उनके प्रमुख उपन्यासों के आधार पर स्त्री जीवन के विविध आयामों का विश्लेषण करता है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि ममता कालिया ने स्त्री की सामाजिक स्थिति, पारिवारिक भूमिका, आर्थिक संघर्ष, आत्मचेतना, अस्मिता तथा स्वतंत्र अस्तित्व की आकांक्षा को किस प्रकार चित्रित किया है। शोध के दौरान यह पाया गया कि ममता कालिया के उपन्यासों की स्त्रियाँ पारंपरिक बंधनों से जूझते हुए अपने आत्मसम्मान और पहचान की खोज करती हैं। वे केवल गृहिणी या पारिवारिक उत्तरदायित्वों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षित, आत्मनिर्भर एवं संघर्षशील व्यक्तित्व के रूप में उभरती हैं। उनके साहित्य में स्त्री-विमर्श का स्वर व्यावहारिक एवं यथार्थवादी है, जो आधुनिक भारतीय स्त्री के जीवनानुभवों को अभिव्यक्ति प्रदान करता है। साथ ही, उनके उपन्यासों की भाषा सरल, सहज, व्यंग्यात्मक तथा संवादप्रधान है, जो कथ्य को प्रभावशाली बनाती है। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि ममता कालिया ने अपने उपन्यासों के माध्यम से स्त्री जीवन के सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक पक्षों का सशक्त चित्रण किया है। उनका साहित्य न केवल स्त्री चेतना को स्वर देता है, बल्कि समकालीन हिन्दी साहित्य में स्त्री-विमर्श को नई दिशा और दृष्टि भी प्रदान करता है।
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Pages:194-200
How to cite this article:
चंदा कुमारी "ममता कालिया के उपन्यासों में स्त्री जीवन का चित्रण". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 194-200
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