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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
भारतीय राजनीति में महिला भागीदारी प्रासंगिकता एवम् चुनौतियाँ
Authors
दीपक नाथ, डॉ हेमा
Abstract
लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी फलती-फूलती है जब समाज के सभी वर्गो को शासन और निर्णय होने में समान प्रतिनिधित्व प्राप्त हो। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी केवल प्रतिनिधित्व का मामला नहीं है, बल्कि लैंगिक न्याय का एक अनिवार्य घटक भी है महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रगति के सभी पहलुओं में एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में देखा जाता है। हालांकि लैंगिक समानता पर भारत की नीतियों की जांच जारी है। स्वतन्त्रता के बाद प्राधिकरण के विकेन्द्रीकरण के माध्यम से भारत में कई स्थानीय सरकारी संरचनाओं में महिलाओं की राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने के लिए कई उपाय किए। पंचायती राज संस्थाओं ने महिलाओं सहित समाज के वंचित क्षेत्रों की नीति संस्थाओं में निर्णय लेने की भूमिका में भागीदारी बढ़ा दी है। इस शोध पेपर का उद्देश्य सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश भारत में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं के सामने आने वाली समस्याओं को पहचानना है। अध्ययन के निष्कर्षो से पता चलता है कि महिला सशक्तिकरण पर नेतृत्व की भूमिका में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। लेकिन नीति क्षेत्र में महिलाओं को शामिल करने में अभी भी कुछ प्रमुख समस्यायें हैं। इस शोध का मुख्य उद्देश्य लोकतान्त्रिक प्रक्रियाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की बाधाओं (जैसे, सामाजिक, आर्थिक और पितृसत्तात्मक चुनौतियाँ ) को पहचानना, पंचायती राज व संसद में उनकी भूमिका का मूल्यांकन करना, और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से नीति निर्माण में समानता सुनिश्चित करना है। यह शोध एक अधिक समावेशी, न्यायपूर्ण और सहभागी लोकतन्त्र स्थापित करने के लिए साक्ष्य आधारित समाधान खोजने की दिशा में काम करता है।
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Pages:42-44
How to cite this article:
दीपक नाथ, डॉ हेमा "भारतीय राजनीति में महिला भागीदारी प्रासंगिकता एवम् चुनौतियाँ". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 42-44
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