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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
हिन्दी के प्रमुख ललित निबंधकारों के निबंधों का लोकतात्त्विक अध्ययन: परंपरा और समकालीन सरोकार
Authors
विमल कुमार मीना, डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंघवी
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र हिन्दी ललित निबंध साहित्य में अंतर्निहित 'लोकतात्त्विक' चेतना का एक गहन और विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। ललित निबंध मूलतः वह विधा है जहाँ वैयक्तिकता, शास्त्र और लोक का अत्यंत सुंदर तादात्म्य दिखाई देता है। इस शोध में हिन्दी साहित्य के चार शीर्षस्थ ललित निबंधकारोंआचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, डॉ. विद्यानिवास मिश्र, कुबेरनाथ राय और डॉ. विवेकी राय के निबंधों को केंद्र में रखकर उनमें समाहित लोक-संस्कृति, लोक-भाषा, लोक-उत्सव, मिथक, लोक-गीत तथा ग्रामीण जीवन-मूल्यों का अन्वेषण किया गया है।
अध्ययन स्पष्ट करता है कि जहाँ हजारीप्रसाद द्विवेदी के यहाँ लोक और शास्त्र का अनूठा समन्वय है, वहीं विद्यानिवास मिश्र की रचनाएँ लोक-जीवन की माटी की सोंधी महक और भोजपुरी-अवधी की मिठास से समृद्ध हैं। कुबेरनाथ राय लोक को देवत्व और आदिम मिथकीय स्मृतियों से जोड़ते हैं, तो विवेकी राय बदलते हुए गाँव और गवईं संस्कृति के यथार्थ को जीवंत करते हैं। भूमंडलीकरण और बाजारवाद के वर्तमान दौर में, जब पारंपरिक लोक-मूल्य तेजी से हाशिए पर जा रहे हैं, इन निबंधकारों का साहित्य हमारी सांस्कृतिक जड़ों को बचाए रखने में एक सेतु का कार्य करता है। यह शोध सिद्ध करता है कि ललित निबंधों का सौंदर्यशास्त्र मूलतः भारतीय लोक-संस्कृति की ही कलात्मक अभिव्यक्ति है।
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Pages:154-155
How to cite this article:
विमल कुमार मीना, डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंघवी "हिन्दी के प्रमुख ललित निबंधकारों के निबंधों का लोकतात्त्विक अध्ययन: परंपरा और समकालीन सरोकार". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 154-155
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