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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
ग्रामीण कृषि श्रमिकों की मौसमी रोजगार सरंचना (उत्तर प्रदेष के जौनपुर जिले के विषेष संदर्भ में)
Authors
सुश्मिता सिंह, मृदुला मिश्रा
Abstract
यह शोध-पत्र जौनपुर जिले में ग्रामीण कृषि श्रमिकों की मौसमी रोजगार संरचना का अध्ययन प्रस्तुत करता है। जौनपुर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जहाँ अधिकतर जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है और आजीविका के लिए कृषि एवं उससे संबंधित कार्यों पर निर्भर रहती है। जिले में लघु एवं सीमांत कृषकों की प्रधानता तथा भूमिहीन कृषि श्रमिकों की बड़ी संख्या मौसमी रोजगार की समस्या को और अधिक गंभीर बनाती है। कृषि उत्पादन का स्वरूप मुख्य रूप से खरीफ (धान), रबी (गेहूँ) और आंशिक रूप से जायद फसलों पर निर्भर करता है, जिसके कारण वर्ष भर श्रम की मांग समान रूप से नहीं रहती।
मौसमी रोजगार संरचना से अर्थ है कि वर्ष के विभिन्न समयों में श्रम की मांग, उपलब्धता और आय के स्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव से है। जौनपुर जिले में खरीफ की फसल का मौसम (जून-सितंबर) के दौरान होता है जिसमें धान की रोपाई, निराई-गुड़ाई और कटाई के समय श्रम की मांग अत्यधिक बढ़ जाती है। इस अवधि में पुरुषों के साथ-साथ महिला श्रमिकों की भागीदारी भी दिखाई देती है। दैनिक मजदूरी दरों में अस्थायी बढ़ोत्तरी देखी जाती है और श्रमिकों को अपेक्षाकृत अधिक कार्य-दिवस उपलब्ध होते हैं। इसी प्रकार रबी फसल का मौसम (अक्टूबर-मार्च) तक रहता है जिसमें गेहूँ की बुवाई और कटाई के समय श्रम की मांग बढ़ती है, किंतु कृषि के बढ़ते यंत्रीकरण जैसे-ट्रैक्टर, थ्रेसर और हार्वेस्टर के कारण श्रम की कुल आवश्यकता में आंशिक कमी भी देखी जा रही है।
मौसमी रोजगार संरचना का प्रभाव केवल आय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एवं मानवीय विकास के विभिन्न पहलुओं को भी प्रभावित करता है। अनियमित आय के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण पर व्यय में कमी आती है। महिला श्रमिकों को कम मजदूरी और अस्थायी कार्य की समस्या का सामना करना पड़ता है। कई परिवारों में बच्चों को भी श्रम में लगना पड़ता है, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित होती है। इस प्रकार मौसमी बेरोजगारी ग्रामीण गरीबी के चक्र को स्थायी रूप प्रदान करती है।
अतः कहा जा सकता है कि जौनपुर जिले में ग्रामीण कृषि श्रमिकों की मौसमी रोजगार संरचना केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक विकास से जुड़ा व्यापक प्रश्न है। समन्वित ग्रामीण विकास नीतियों और स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

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Pages:176-179
How to cite this article:
सुश्मिता सिंह, मृदुला मिश्रा "ग्रामीण कृषि श्रमिकों की मौसमी रोजगार सरंचना (उत्तर प्रदेष के जौनपुर जिले के विषेष संदर्भ में)". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 176-179
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