ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी की उसने कहा था में उदात्त प्रेम
Authors
Dr. D Ananthalakshmi
Abstract
हिंदी कहानी का आरंभिक स्वरूप नीति-कथा, लोककथा और उपदेशात्मक आख्यानों से निर्मित था। बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक आते-आते हिंदी कथा साहित्य एक ऐसे मोड़ पर खड़ा था जहाँ उसे आधुनिक मनुष्य की आंतरिक जटिलताओं, नैतिक द्वंद्वों और स्मृति-बोध को अभिव्यक्त करने वाली विधा बनना था। इसी संक्रमणकाल में चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ जी की कहानी “उसने कहा था” प्रकाशित होती है, जो न केवल हिंदी की पहली आधुनिक कहानियों में गिनी जाती है, बल्कि आगे आने वाली संपूर्ण कथा-परंपरा की वैचारिक दिशा भी निर्धारित करती है।
हिंदी कहानी के विकासक्रम में “उसने कहा था” का महत्व केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि वैचारिक है। यह कहानी प्रेमकथा होते हुए भी रोमानी नहीं है, युद्धकथा होते हुए भी वीर-रसात्मक नहीं है, और देशभक्ति की कथा होते हुए भी नारेबाज़ी से सर्वथा मुक्त है। यह कहानी प्रेम, युद्ध और त्याग की कथा होते हुए भी वस्तुतः स्मृति, वचन और नैतिक उत्तरदायित्व का आख्यान है।
इसका महत्त्व इस बात में निहित है कि यह व्यक्ति के नैतिक निर्णय को साहित्य का केंद्र बनाती है। गुलेरी जी का योगदान हिंदी कहानी को घटना से विचार और भावुकता से नैतिकता की ओर ले जाने में निर्णायक माना जाता है। “उसने कहा था” ने यह सिद्ध किया कि कहानी केवल मनोरंजन या संदेश नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों की सूक्ष्म जाँच-पड़ताल का माध्यम भी हो सकती है।
Download
Pages:190-193
How to cite this article:
Dr. D Ananthalakshmi "पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी की उसने कहा था में उदात्त प्रेम ". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 190-193
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

