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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
सुरेंद्र वर्मा के नाटकों का रंगमंचीय अध्ययन
Authors
सौरभ कुमार शर्मा, ओमप्रकाश द्विवेदी
Abstract
इस प्रस्तुत शोध पत्र हिंदी के सुप्रसिद्ध नाटककार सुरेंद्र वर्मा के नाटकों का रंगमंचीय दृष्टिकोण से विश्लेषण करता है। सुरेंद्र वर्मा ने अपने नाटकों में ऐतिहासिक, मिथकीय एवं समकालीन विषयों को रंगमंच की तकनीक से जोड़कर हिंदी नाट्य साहित्य को एक नई दिशा और उर्जा प्रदान की है। इस शोध में उनके प्रमुख नाटकों-'आठवाँ सर्ग', 'द्रौपदी', 'सूर्य की अंतिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक', 'एक दूनी एक',तथा 'रति का कंगन' आदि का रंगमंचीय संरचना, संवाद-शिल्प, प्रकाश-व्यवस्था, पात्र-निर्माण एवं नाट्य-प्रदर्शन की दृष्टि से तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। शोध में यह स्पष्ट होता है कि सुरेंद्र वर्मा के नाटक केवल पाठ्य-रूप में नहीं, बल्कि रंगमंच पर प्रस्तुति की दृष्टि से भी अत्यधिक प्रभावशाली एवं सशक्त हैं।
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Pages:164-166
How to cite this article:
सौरभ कुमार शर्मा, ओमप्रकाश द्विवेदी "सुरेंद्र वर्मा के नाटकों का रंगमंचीय अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 164-166
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