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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के ललित निबंधों में सामयिक-बोध
Authors
धीरज कुमार सोनी
Abstract
यह शोध-पत्र हिंदी के प्रसिद्ध मानवतावादी साहित्यकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के ललित निबंधों में निहित सामयिक-बोध का विस्तृत और समग्र अध्ययन प्रस्तुत करता है। द्विवेदी जी ने अपने निबंधों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, इतिहास, परम्परा, समाज, राजनीति और मानवीय मूल्यों को इस प्रकार अभिव्यक्त किया है कि उनका साहित्य अपने समय का जीवंत दस्तावेज बन गया है। उनके निबंधों में अतीत की सांस्कृतिक चेतना और वर्तमान जीवन की जटिलताओं का सशक्त समन्वय दिखाई देता है। वे समय की बदलती प्रवृत्तियों, सामाजिक विघटन, नैतिक अवमूल्यन, सांस्कृतिक विस्मृति और मानवीय संवेदनहीनता पर गहरी दृष्टि डालते हैं। इस    शोध-पत्र में उनके प्रमुख निबंध-संग्रहों के आधार पर सामयिक चेतना, सामाजिक यथार्थ, सांस्कृतिक पुनर्जागरण, राष्ट्रीय अस्मिता तथा मानवीय सरोकारों का विश्लेषण किया गया है।
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Pages:174-175
How to cite this article:
धीरज कुमार सोनी "आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के ललित निबंधों में सामयिक-बोध". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 174-175
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