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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
मन्नू भंडारी की कहानी ‘यही सच है’ में स्त्री-मन, प्रेम और आत्मचेतना का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण
Authors
डॉ. नंदिनी चौबे
Abstract
साठोत्तरी हिंदी कहानी ने आधुनिक मनुष्य के मानसिक विखंडन, अकेलेपन, संबंधों की टूटन तथा अस्तित्वगत संकट को केंद्र में स्थापित किया। नई कहानी आंदोलन के अंतर्गत स्त्री केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह एक स्वतंत्र चेतना और संवेदनशील व्यक्तित्व के रूप में उभरकर सामने आई। मन्नू भंडारी इस आंदोलन की ऐसी महत्वपूर्ण कथाकार हैं जिन्होंने आधुनिक स्त्री के अंतर्मन, उसकी भावनात्मक जटिलताओं, प्रेम-द्वंद्व और आत्मचेतना को अत्यंत सूक्ष्मता और मनोवैज्ञानिक गहराई के साथ अभिव्यक्त किया है।
‘यही सच है’ उनकी सर्वाधिक चर्चित कहानियों में से एक है। यह कहानी केवल त्रिकोणात्मक प्रेम-कथा नहीं, बल्कि आधुनिक स्त्री की मानसिक संरचना, स्मृतियों, असुरक्षाओं, भावनात्मक विखंडन और आत्मपहचान की जटिल प्रक्रिया का कलात्मक दस्तावेज़ है। प्रस्तुत शोध-पत्र में कहानी की नायिका दीपा के माध्यम से स्त्री-मन, प्रेम, स्मृति, अवचेतन, आत्मसंघर्ष तथा आधुनिक स्त्री-चेतना का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है। साथ ही कहानी के कथानक, प्रतीक-योजना, भाषा-शिल्प तथा नई कहानी आंदोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि पर भी विस्तार से विचार किया गया है।
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Pages:201-203
How to cite this article:
डॉ. नंदिनी चौबे "मन्नू भंडारी की कहानी ‘यही सच है’ में स्त्री-मन, प्रेम और आत्मचेतना का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 201-203
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