ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
महाभारत के पुरुष पात्रों के स्त्री-विषयक मनोविज्ञान की समकालीन प्रासंगिकता (नरेंद्र कोहली कृत महासमर उपन्यास के विशिष्ट संदर्भ में)
Authors
तरुण किशोर नौटियाल
Abstract
सदियों से महाकाव्यात्मक ग्रंथ महाभारत भारतीय ज्ञान-परंपरा के वैष्विक प्रतिनिधित्व में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह भारत की सांस्कृतिक चेतना और समृद्ध साहित्यिक परंपराओं का द्योतक तो है ही, साथ ही भारतीय समाज के उत्कृष्ट मनोवज्ञान और उच्चतर मानसिक उदात्तता का जीवंत प्रमाण भी है। ऋषि-मुनियों की भूमि भारत वर्ष में जो कुछ भी है वह इस ग्रंथ के रचयिता महर्षि वेदव्यास ने अपने लेखन कौशल से महाभारत में भी उपस्थित करा दिया है। इसी क्रम में भारतीय मनोविज्ञान को समझने की दृष्टि से भी यह ग्रंथ अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। महाभारत के पात्र भारतीय जनमानस में इस प्रकार घुले-मिलें हैं कि उनकी चेतना का उत्कर्ष और अपकर्ष निरंतर हमें मार्गदर्शन प्रदान करता है। भारतीय सामाजिक मनोविज्ञान को समझने की दृष्टि से महाभारत की कथा, प्रसंग और इसके पात्र समकालीन भारतीय मनोविज्ञान को नई दृष्टि प्रदान कर सकते हैं। भारतीय पित्रसत्तात्मक समाज में पुरुषों की स्त्री-विषयक मानसिकता को समझने की दृष्टि से तो यह महाकाव्य पूर्णतः प्रासंगिक है। संस्कृत से लेकर विभिन्न भारतीय भाषाओं में महाभारत ग्रंथ की विशद व्याख्याओं में समकालीन सामाजिक व्यवस्था के विभिन्न आयामों को पर्याप्त स्थान दिया गया है। हिन्दी-साहित्य में भी आदरणीय नरेंद्र कोहली जी ने अपने बृहदाकार महकाव्यात्मक उपन्यास महासमर में महाभारत की विशेषतः पांडव-कथा की आधुनिक दृष्टि से मौलिक और वैज्ञानिक व्याख्या की है। इस उपन्यास के माध्यम से महाभारत के पुरुष पात्रों यथा-शांतनु, भीष्म, धृतराष्ट्र, युधिष्ठिर, कृष्ण, अर्जुन, भीम, दुर्याेधन, दुशासन और कर्ण इत्यादि के स्त्री-विषयक मनोविज्ञान की समकालीन प्रासंगिकता को समझा सकता है।
Download
Pages:167-170
How to cite this article:
तरुण किशोर नौटियाल
"महाभारत के पुरुष पात्रों के स्त्री-विषयक मनोविज्ञान की समकालीन प्रासंगिकता (नरेंद्र कोहली कृत महासमर उपन्यास के विशिष्ट संदर्भ में)". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 167-170
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

