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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
हरियाणा के नाट्य साहित्य और हरियाणा साहित्य अकादमी की भूमिका
Authors
मोनिका, डॉ. आशा सहारण
Abstract
प्रस्तुत शोध का उद्देश्य हरियाणा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक परिप्रेक्ष्य के आधार पर नाट्य साहित्य के विकास, प्रवृत्तियों तथा सामाजिक भूमिका का समग्र विश्लेषण करना है। अध्ययन में हरियाणा की प्राचीन ऐतिहासिक पृष्ठभूमि—विशेषतः वैदिक काल, महाभारत परंपरा, मध्यकालीन युद्धों तथा स्वतंत्रता आंदोलन—को साहित्यिक विकास से संबद्ध करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि इस प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना ने नाट्य साहित्य को विशिष्ट दिशा प्रदान की है। शोध में लोकनाट्य परंपरा ‘सांग’, रागिनी, लोकगीत और हरियाणवी भाषा की अभिव्यक्तिगत विशेषताओं का विश्लेषण करते हुए यह प्रतिपादित किया गया है कि नाट्य साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जनजागरण का प्रभावशाली साधन है। अध्ययन के अंतर्गत जातिगत भेदभाव, महिला सशक्तिकरण, किसान और श्रमिक जीवन, भ्रष्टाचार, पर्यावरणीय चेतना तथा सामाजिक कुरीतियों जैसे विषयों के नाट्य प्रस्तुतीकरण का मूल्यांकन किया गया है। साथ ही हरियाणा साहित्य अकादमी की स्थापना, उद्देश्य, साहित्य संरक्षण, शोध प्रोत्साहन, अनुवाद कार्य, प्रकाशन योजनाएँ तथा स्थानीय लेखकों और कलाकारों को मंच प्रदान करने की भूमिका का समीक्षात्मक परीक्षण किया गया है। निष्कर्षतः यह स्थापित किया गया है कि हरियाणवी नाट्य साहित्य सामाजिक चेतना का संवाहक है और हरियाणा साहित्य अकादमी ने इस परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और राष्ट्रीय पहचान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
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Pages:131-134
How to cite this article:
मोनिका, डॉ. आशा सहारण "हरियाणा के नाट्य साहित्य और हरियाणा साहित्य अकादमी की भूमिका". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 131-134
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