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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
दक्षिण भारत में हिन्दी का स्थानमान
Authors
जयनागेश एनएम
Abstract
दक्षिण भारत में हिन्दी का स्थान लगातार विकसित हो रहा है। शिक्षा, मीडिया और रोजगार के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता के कारण इसे संपर्क भाषा के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, हालांकि राजनीतिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के चलते इसकी स्वीकार्यता राज्य दर राज्य भिन्न है। हिन्दी की स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक है कि इसे थोपा न जाए, बल्कि संवाद, संस्कृति और शिक्षा के माध्यम से स्वाभाविक रूप से अपनाया जाए। दक्षिण भारत में हिंदी की स्थिति ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक कारणों से अलग रही है ।दक्षिण भारत में हिंदी का स्थान काफी सीमित है, जहाँ हिंदी भाषा का व्यापक रूप से उपयोग नहीं किया जाता है। दक्षिण भारत में लोग तमिल, तेलुगु, कन्नड़, और मलयालम जैसी द्रविड़ भाषाओं को अपनी मातृभाषा के रूप में प्रयोग करते हैं।भाषा किसी भी समाज की पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और दक्षिण भारत में लोग अपनी भाषा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।बेंगलुरु में पालकगण अपने बच्चों से हमेशा ही ज्यादातर अंग्रेजी या हिन्दी में बात करते हैं। जब युवा लोग सार्वजनिक स्थान पर मौज मस्ती कर रहे होते हैं, तब भी हमें हिन्दी या अंग्रेजी ही ज्यादा सुनाई पड़ती है। कुछ राज्यों में जैसे तमिलनाडु, ” त्रिभाषा सूत्र’ को लागू नहीं किया गया है, और हिन्दी की पढ़ाई सीमित है । स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दक्षिण भारत में हिंदी प्रचार सभा की स्थापना(१९१८, मद्रास) |
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Pages:1-4
How to cite this article:
जयनागेश एनएम "दक्षिण भारत में हिन्दी का स्थानमान". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 1-4
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