ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
भारत की राजभाषा हिन्दी: एक विवेचनात्मक अध्ययन
Authors
डॉ. अनुपमा छाजेड़
Abstract
हमारे संविधान में हिन्दी को भारत की राजभाषा कहा गया है। भारत का संविधान अध्याय 17 अनुच्छेद 343 में कहा गया है कि संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी होगी। यह घोषणा 14 सितम्बर 1949 को की गई। इस दिवस को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। राजभाषा का संबंध मात्र प्रशासन से होता है। इस संवैधानिक प्रावधान के पश्चात् राजभाषा अधिनियम 1963 पारित किया गया, जिसमें हिन्दी के प्रचार प्रसार पर बल दिया गया व पत्र व्यवहार हेतु हिन्दी को मुख्य भाषा के रूप में या हिन्दी अनुवाद को प्राधिकृत रूप माना गया।
सन् 1968 में संघ के दोनों सदनों द्वारा हिन्दी के प्रचार प्रसार हेतु गहन एवं व्यापक कार्यक्रम तैयार करने के संकल्प लिए गए। सन् 1976 में पुनः राजभाषा अधिनियम में चार प्रमुख चरण के माध्यम से कर्मचारियों एवं संस्थाओं को हिन्दी में कार्य करने एवं उन्हें उचित एवं अच्छा कार्य करने पर पुरस्कृत कर हिन्दी के प्रचार प्रसार पर बल दिया गया व अनेक राजभाषा कार्यान्वयन समितियों ने प्रशंसनीय कार्य किए। साथ ही सरकारी कार्यालयों से जारी समस्त पत्र हिन्दी-अंग्रेजी द्विभाषी रूप में जारी किये जावेंगे। इस देश की राजभाषा हिन्दी ही हो सकती है। अन्य भाषा या अंग्रेजी भाषा नहीं। इस हेतु अनेक कार्य क्रियान्वित हुए एवं काफी हद तक सफल भी है।
Download
Pages:141-143
How to cite this article:
डॉ. अनुपमा छाजेड़ "भारत की राजभाषा हिन्दी: एक विवेचनात्मक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 141-143
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

