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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
प्रेमचंद की कफन में अमानवीय गरीबी का चित्रण
Authors
Dr. D Ananthalakshmi
Abstract
मुंशी प्रेमचंद (1880–1936) हिन्दी कथा साहित्य के प्रमुख स्तंभ हैं। वे अपने यथार्थवादी दृष्टिकोण, जनसरोकारों से जुड़ी विषयवस्तु, और सरल-सुबोध भाषा के लिए जाने जाते हैं। ‘कफन’ उनकी अंतिम प्रकाशित कहानियों में से एक है, जो 1936 में पत्रिका हंस में छपी थी। यह कहानी एक निर्धन दलित परिवार की कथा है जो अपने जीवन की पीड़ा, असहायता, और समाज के प्रति कटुता को लेकर गहरी छाप छोड़ती है। कहानी में प्रेमचंद समाज की क्रूरताओं, जातिगत भेदभाव और व्यवस्था के प्रति विद्रोह को बेहद मार्मिक तरीके से चित्रित करते हैं।मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी 'कफन' (1936) केवल एक कहानी नहीं, बल्कि भीषण गरीबी के कारण मानव मन के नैतिक पतन और संवेदनहीनता का एक गहरा मनोवैज्ञानिक और सामाजिक दस्तावेज है। इस कहानी के माध्यम से प्रेमचंद ने आर्थिक विषमता का अत्यंत मार्मिक और यथार्थवादी चित्रण किया है
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Pages:171-173
How to cite this article:
Dr. D Ananthalakshmi "प्रेमचंद की कफन में अमानवीय गरीबी का चित्रण". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 171-173
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