ARCHIVES
VOL. 2, ISSUE 6 (2016)
नाथ सम्प्रदाय : योग, तंत्र, आयुर्वेद, बौद्ध अध्ययन, एवं हिन्दी के क्षेत्र में साहित्य सर्वेक्षण
Authors
उमाशंकर कौशिक, डाॅ0 उपेन्द्र बाबु खत्री, डाॅ0 अखिलेश कुमार सिंह, डाॅ0 राहुल सिद्धार्थ
Abstract
नाथ सम्प्रदाय का उल्लेख विभिन्न क्षेत्र के ग्रंथों में जैसे-योग (हठयोग) तंत्र (अवधूत मत या सिद्ध मत) आयुर्वेद (रसायन चिकित्सा) बौद्ध अध्ययन (सहजयान तिब्बतियन परम्परा 84 सिद्धों में) हिन्दी (आदिकाल के कवियों के रूप) में चर्चा मिलती हैं। यौगिक ग्रंथों में नाथ सिद्धः- हठप्रदीपिका के लेखक स्वात्माराम और इस ग्रंथ के प्रथम टीकाकार ब्रह्मानंद ने हठ प्रदीपिका ज्योत्स्ना के प्रथम उपदेश में 5 से 9 वे श्लोक में 33 सिद्ध नाथ योगियों की चर्चा की है। ये नाथसिद्ध कालजयी होकर ब्रह्माण्ड में विचरण करते है। इन नाथ योगियों में प्रथम नाथ आदिनाथ को माना गया है जो स्वयं शिव है जिन्होंने हठयोग की विद्या प्रदान की जो राजयोग की प्राप्ति में सीढ़ी के समान है। आयुर्वेद ग्रंथों में नाथ सिद्धों की चर्चा:- रसायन चिकित्सा के उत्पत्ति करता के रूप प्राप्त होता है। जिन्होंने इस शरीर रूपी साधन को जो मोक्ष में माध्यम है इस शरीर को रसायन चिकित्सा पारद और अभ्रक आदि रसायानों की उपयोगिता सिद्ध किया। पारदादि धातु घटित चिकित्सा का विशेष प्रवत्र्तन किया था तथा विभिन्न रसायन ग्रंथों की रचना की उपरोक्त कथन सुप्रसिद्ध विद्वान और चिकित्सक महामहोपाध्याय श्री गणनाथ सेन ने लिखा है।तंत्र गंथों में नाथ सम्प्रदाय: - नाथ सम्प्रदाय के आदिनाथ शिव है, मूलतः समग्र नाथ सम्प्रदाय शैव है। शाबर तंत्र में कपालिको के 12 आचार्यों की चर्चा है- आदिनाथ, अनादि, काल, वीरनाथ, महाकाल आदि जो नाथ मार्ग के प्रधान आचार्य माने जाते है। नाथों ने ही तंत्र गंथों की रचना की है। षोड्श नित्यातंत्र में शिव ने कहा है कि - नव नाथों- जडभरत मत्स्येन्द्रनाथ, गोरक्षनाथ, , सत्यनाथ, चर्पटनाथ, जालंधरनाथ नागार्जुन आदि ने ही तंत्रों का प्रचार किया है।नाथ सम्प्रदाय का उल्लेख विभिन्न क्षेत्र के ग्रंथों में जैसे-योग (हठयोग) तंत्र (अवधूत मत या सिद्ध मत) आयुर्वेद (रसायन चिकित्सा) बौद्ध अध्ययन (सहजयान तिब्बतियन परम्परा 84 सिद्धों में) हिन्दी (आदिकाल के कवियों के रूप) में चर्चा मिलती हैं। यौगिक ग्रंथों में नाथ सिद्धः- हठप्रदीपिका के लेखक स्वात्माराम और इस ग्रंथ के प्रथम टीकाकार ब्रह्मानंद ने हठ प्रदीपिका ज्योत्स्ना के प्रथम उपदेश में 5 से 9 वे श्लोक में 33 सिद्ध नाथ योगियों की चर्चा की है। ये नाथसिद्ध कालजयी होकर ब्रह्माण्ड में विचरण करते है। इन नाथ योगियों में प्रथम नाथ आदिनाथ को माना गया है जो स्वयं शिव है जिन्होंने हठयोग की विद्या प्रदान की जो राजयोग की प्राप्ति में सीढ़ी के समान है। आयुर्वेद ग्रंथों में नाथ सिद्धों की चर्चा रसायन चिकित्सा के उत्पत्ति करता के रूप प्राप्त होता है। जिन्होंने इस शरीर रूपी साधन को जो मोक्ष में माध्यम है इस शरीर को रसायन चिकित्सा पारद और अभ्रक आदि रसायानों की उपयोगिता सिद्ध किया। पारदादि धातु घटित चिकित्सा का विशेष प्रवत्र्तन किया था तथा विभिन्न रसायन ग्रंथों की रचना की उपरोक्त कथन सुप्रसिद्ध विद्वान और चिकित्सक महामहोपाध्याय श्री गणनाथ सेन ने लिखा है।तंत्र गंथों में नाथ सम्प्रदाय - नाथ सम्प्रदाय के आदिनाथ शिव है, मूलतः समग्र नाथ सम्प्रदाय शैव है। शाबर तंत्र में कपालिको के 12 आचार्यों की चर्चा है- आदिनाथ, अनादि, काल, वीरनाथ, महाकाल आदि जो नाथ मार्ग के प्रधान आचार्य माने जाते है। नाथों ने ही तंत्र गंथों की रचना की है। षोड्श नित्यातंत्र में शिव ने कहा है कि - नव नाथों- जडभरत मत्स्येन्द्रनाथ, गोरक्षनाथ, , सत्यनाथ, चर्पटनाथ, जालंधरनाथ नागार्जुन आदि ने ही तंत्रों का प्रचार किया है।बौद्ध अध्ययन में नाथ सिद्ध 84 सिद्धों में आते है। राहुल सांकृत्यायन ने गंगा के पुरात्त्वांक में बौद्ध तिब्बतियन परम्परा के 84 सहजयानी सिद्धों की चर्चा की है। जिसमें से अधिकांश सिद्ध नाथसिद्ध योगी है जिनमें लुइपाद मत्स्येन्द्रनाथ, गोरक्षपा गोरक्षनाथ, चैरंगीपा चैरंगीनाथ, शबरपा शबर आदि की चर्चा है जिन्हंे सहजयानीसिद्धों के नाम से जाना जाता है। हिन्दी में नाथसिद्ध:- हिन्दी साहित्य में आदिकाल के कवियों में नाथ सिद्धों की चर्चा मिलती है।चर्चा है। अपभ्रंस, अवहट्ट भाषाओं की रचनाऐं मिलती है जो हिन्दी की प्रारंभिक काल की है। इनकी रचनाओं में पाखंड़ों आडंबरो आदि का विरोध हैं तथा इन्की रचनाओं में चित्त, मन, आत्मा, योग, धैर्य, मोक्ष आदि का समावेश मिलता है जो साहित्य के जागृति काल की महत्वपूर्ण रचनाऐं मानी जाती है। जो जनमानष को योग की शिक्षा, जनकल्याण तथा जागरूकता प्रदान करने के लिए था। बौद्ध अध्ययन में नाथ सिद्ध:- 84 सिद्धों में आते है। राहुल सांकृत्यायन ने गंगा के पुरात्त्वांक में बौद्ध तिब्बतियन परम्परा के 84 सहजयानी सिद्धों की चर्चा की है। जिसमें से अधिकांश सिद्ध नाथसिद्ध योगी है जिनमें लुइपाद मत्स्येन्द्रनाथ, गोरक्षपा गोरक्षनाथ, चैरंगीपा चैरंगीनाथ, शबरपा शबर आदि की चर्चा है जिन्हंे सहजयानीसिद्धों के नाम से जाना जाता है। हिन्दी में नाथसिद्ध:- हिन्दी साहित्य में आदिकाल के कवियों में नाथ सिद्धों की चर्चा मिलती है।चर्चा है। अपभ्रंस, अवहट्ट भाषाओं की रचनाऐं मिलती है जो हिन्दी की प्रारंभिक काल की है। इनकी रचनाओं में पाखंड़ों आडंबरो आदि का विरोध हैं तथा इन्की रचनाओं में चित्त, मन, आत्मा, योग, धैर्य, मोक्ष आदि का समावेश मिलता है जो साहित्य के जागृति काल की महत्वपूर्ण रचनाऐं मानी जाती है। जो जनमानष को योग की शिक्षा, जनकल्याण तथा जागरूकता प्रदान करने के लिए था।
Download
Pages:22-23
How to cite this article:
उमाशंकर कौशिक, डाॅ0 उपेन्द्र बाबु खत्री, डाॅ0 अखिलेश कुमार सिंह, डाॅ0 राहुल सिद्धार्थ "नाथ सम्प्रदाय : योग, तंत्र, आयुर्वेद, बौद्ध अध्ययन, एवं हिन्दी के क्षेत्र में साहित्य सर्वेक्षण". International Journal of Hindi Research, Vol 2, Issue 6, 2016, Pages 22-23
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

