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VOL. 2, ISSUE 6 (2016)
हिंदी कहानी का विकास सामाजिक परिवर्तन के सन्दर्भ में
Authors
डॉ0 अनुपमा छाजेड़
Abstract
साहित्य विधाओं का अमूल्य भण्डार है। इन विधाओं में कहानी को मूर्धन्य स्थान प्राप्त है। साहित्य की समस्त विधाओं में यहीं एक ऐसी विधा है जो पाठक का चरम अनुरंजन करने के साथ साथ एक चिरन्तन रस का उदघाटन करने में प्रयत्नशील रहती है एवं साथ ही सफल भी होती है। अर्थात अल्पसमय में मनोरंजन एवं ज्ञान की उपलब्धि केवल कहानी द्वारा ही संभव है। आज का युग मशीनरी का युग है, प्रत्येक व्यक्ति कम समय में अधिक लाभ लेना चाहता है। अतः इस युग में कहानी की सफलता का मुख्य कारण मनुष्य की व्यस्तता है। कहानी के अंकुर हम सभी में विद्यमान है इसलिए कहानी की परम्परा कभी विनष्ट नहीं हुई और लगातार वृद्धि कर रहीं है युगों से प्रगति पथ पर अग्रसर, नित्य परिवर्तनशील एवं नवीन आभायुक्त कहानी को भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता रहा है भारत में इसे दंतकथा, कादम्बरी, हितोपदेश, कहानी, कथा, लघुकथा, वार्ता आदि।अंग्रेजी में इसे स्टोरी कहते हैं।
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Pages:43-46
How to cite this article:
डॉ0 अनुपमा छाजेड़ "हिंदी कहानी का विकास सामाजिक परिवर्तन के सन्दर्भ में". International Journal of Hindi Research, Vol 2, Issue 6, 2016, Pages 43-46
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