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VOL. 3, ISSUE 2 (2017)
अनूप अषेष के नवगीतों में नवीन बिम्ब ग्राह्यता एवं प्रतीक योजनाएं
Authors
डाॅ0 बीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी
Abstract
अनूप अषेष के नवगीतों का अति निकटता एवं स्पर्शता के साथ रसास्वादन किया जाए तो, चराचर जगत की वह सुखद आनंद एवं मनमोहक महक का आलिंगन होने लगता है जो किसी अन्य कविता में दुर्लभ ही प्राप्त होता है। आपके सम्पूर्ण नवगीतों में नवीन बिम्ब विकास की झलक एक कोने से दूसरे कोने तक एवं एक छोर से दूसरे छोर तक एक-एक करके नये आयामों एवं मुकामों की मुलाकात कराता हुआ सूक्ष्म से सूक्ष्म प्रतीकों की झाकियों की सज्जायुक्त संसार का भ्रमण तथा प्रभावी साक्षात्कार कराता है और वाचक एवं श्रोता को उस संसार से बाहर निकालने की इच्छा बिलकुल ही नहीं होती है जो हर पगडंडी जो आगे प्रतीकों के माध्यक से आगे-आगे चलती है। वह कहीं न कहीं एक बहुत बडे राष्ट्र मार्ग एवं विश्वमार्ग को जोड़ती है तथा पथिक अपनी यात्रा में नवीन विम्बों के माध्यम से अनेक प्रेरणा युक्त योजनाओं का साक्षात्कार करके आत्म विभोर होता है।
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Pages:37-39
How to cite this article:
डाॅ0 बीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी "अनूप अषेष के नवगीतों में नवीन बिम्ब ग्राह्यता एवं प्रतीक योजनाएं". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 2, 2017, Pages 37-39
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