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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 3, ISSUE 5 (2017)
हिन्दी में ललित निबन्ध लेखन परम्परा: परिचयात्मक विवेचन
Authors
डाॅ0 रमेश चन्द्र
Abstract
पाश्चात्य एवं भारतीय साहित्य में ललित निबन्ध लेखन परम्परा उदारवादी विचारधारा के काल में चरमोत्कर्ष पर पहुंची क्योंकि उदारवादी विचारधारा जहां अपनी दृष्टि को सम्मान करती है वहीं दूसरों की दृष्टि का भी सम्मान करती है तथा दूसरों की दृष्टि से देखे गये सत्य को स्वीकार करती है। पाश्चात्य साहित्य के साथ-साथ हिन्दी साहित्य में निबन्ध के विकास में यह उदारवादी दृष्टि महत्वपूर्ण सिद्ध हुई। पश्चिमी सम्पर्क से उत्पन्न एवं उदारवाद से प्रेरित होकर ललित निबन्ध विधा हिन्दी में अवतरित हुई तथा इस विधा में मानवीय चिन्तन व वैचारिक स्वच्छन्दता को विशेष महत्व दिया जाता है। इस मनोवृत्ति में पत्रकारिता को, पत्रकारिता ने निबन्ध को प्रभावित एवं प्रेरित किया। भारतीय गद्य साहित्य के अभ्युत्थान काल में अनेक उदारवादी लेखक पत्रकार भी थे। ललित निबन्धकला का पाश्चात्य एवं भारतीय साहित्य में विवेचन करना इस शोध-पत्र का मुख्य प्रयोजन है।
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Pages:26-28
How to cite this article:
डाॅ0 रमेश चन्द्र "हिन्दी में ललित निबन्ध लेखन परम्परा: परिचयात्मक विवेचन". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 5, 2017, Pages 26-28
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