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VOL. 3, ISSUE 6 (2017)
प्रेमचंद और श्री लंका के कहानीकार मार्टिन विक्रमसिंह की कहानियों में अंतर्गत प्रतीकात्मकता और वर्णनात्मकता
Authors
डाॅ0 आर0के0डी0 निलंति कुमारी राजपक्ष
Abstract
भारत के प्रख्यात कहानीकार प्रेमचन्द का समय सन् 1880 से सन् 1936 तक और श्री लंका के प्रमुख कहानीकार मार्टिन विक्रमसिंह का समय सन् 1890 से सन् 1976 तक है। दोनों साहित्यकार अलग-अलग देशों से हैं फिर भी उनकी कहानियों में बहुत सी समानताएँ पाई जाती हैं। समकालीन होने के नाते दोनों कहानीकारों की विषयवस्तु पर तत्कालीन समस्याओं का प्रभाव पड़ा है।
प्रेमचन्द तथा मार्टिन विक्रमसिंह की कहानियों में वर्णनात्मकता और प्रतीकात्मकता का प्रयोग मिलता है।
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Pages:22-24
How to cite this article:
डाॅ0 आर0के0डी0 निलंति कुमारी राजपक्ष "प्रेमचंद और श्री लंका के कहानीकार मार्टिन विक्रमसिंह की कहानियों में अंतर्गत प्रतीकात्मकता और वर्णनात्मकता". International Journal of Hindi Research, Vol 3, Issue 6, 2017, Pages 22-24
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