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VOL. 4, ISSUE 1 (2018)
जयप्रकाश कर्दम के उपन्यास ‘छप्पर’ की प्रासंगिकता आज-कल
Authors
Aswathi M Nair, Dr. B Anirudhan
Abstract
जयप्रकाश कर्दम का ‘छप्पर’ उपन्यास पहला दलित उपन्यास है| जिसमें दलितों के जिंदगी के बारे में बताते है | लेकिन आज भी दलितों की स्थिति उतनी बुरी है, नहीं| तो छप्पर उपन्यास प्रासंगिक है या नहीं, छप्पर प्रासंगिक है दलितों के लिए भी और गैर दलितों के लिए भी | भारत में अभावग्रस्थ जीवन जीने वाले सभी लोग दलित नहीं है | छप्पर एक उम्मीद का किरण है, वह सबको आगे बढने की शक्ति देता है| छप्पर में लोगों को आपस में मिलके रहने की सुविचार लेखक सबको देते हैं |
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Pages:29-31
How to cite this article:
Aswathi M Nair, Dr. B Anirudhan "जयप्रकाश कर्दम के उपन्यास ‘छप्पर’ की प्रासंगिकता आज-कल". International Journal of Hindi Research, Vol 4, Issue 1, 2018, Pages 29-31
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