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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 4, ISSUE 3 (2018)
वर्तमान के सन्दर्भ में शेखर: एक जीवनी (पहला भाग) उपन्यास की प्रासंगिकता
Authors
डॉ. बिउटी दास
Abstract
अज्ञेय कृत "शेखर: एक जीवनी” (पहला भाग) उपन्यास के क्षेत्र में उपन्यासकार की एक नवीनतम प्रयोग हैं। उपन्यासकार ने वाहियक दृश्टिकोण के बदले प्रस्तुत उपन्यास में पात्रों के आंतरिक क्रिया-प्रतिक्रियाओं को बखुबी अभिव्यक्त करने का प्रयास किया हैं। अस्थिरता, अकेलापन, अजनबीपन, पीड़ा आदि ने आज के युवापीढ़ियों को घेरे रखा हैं। उपन्यास के केंद्रीय पात्र "शेखर" आज के युवापीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता हैं। उपन्यासकार ने पात्र के उन मनःस्थितियों को नई संवेदना से संरचना कर अपनी कलात्मकता का परिचय दिया हैं । शेखर कोई बड़ा आदमी तो नहीं हैं, वह आधुनिक तथा हमारे बीच का ही एक आम इंसान हैं। शेखर में ऐसा कोई आदर्श या नायक होने के विशेष गुण भी नहीं है जिसके सहारे नई पीढ़ी के लोग उसे अनुसरण करने के लिए प्रेरित हो और वह ऐसे कोई महान कार्य किया भी नहीं जिसके कारण समय के प्रवाहमान गति में उसके दस्तख़त को सदा सदा के लिए लोगों के स्मृति के पट पर बिराजमान रहे । मेरे शोध पत्र का उद्देश्य वर्तमान के सन्दर्भ में शेखर:एक जीवनी (पहला भाग) उपन्यास की प्रासंगिकता को अभिव्यक्त करना हैं ।
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Pages:31-33
How to cite this article:
डॉ. बिउटी दास "वर्तमान के सन्दर्भ में शेखर: एक जीवनी (पहला भाग) उपन्यास की प्रासंगिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 4, Issue 3, 2018, Pages 31-33
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