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VOL. 4, ISSUE 3 (2018)
स्वातंत्र्योंत्तर हिन्दी उपन्यास की विशेषताएँ
Authors
डाॅ० दिलीप कुमार झा
Abstract
स्वतंत्रता के बाद हिन्दी - उपन्यास के क्षेत्र में बदलाव आया। हिन्दी उपन्यासों की नवीनतम धारा को प्रयोगवादी उपन्यास या आधुनिकता बोध का उपन्यास कहा जा सकता है। औधौगिकरण, भ्रष्ट व्यवस्था, बदलते परिवेश, महानगरीय जीवन, अकेलापन निराशा, घोर अवसाद, तनाव आदि विषयों एंव भावों से जुड़कर हिन्दी - उपन्यास की वस्तु और प्रक्रिया नवीन होती गई। प्रस्तुत शोध पत्र में स्वातंत्र्योंत्तर हिन्दी उपन्यास की विशिषताओं पर विचार किया गया है।
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Pages:34-36
How to cite this article:
डाॅ० दिलीप कुमार झा "स्वातंत्र्योंत्तर हिन्दी उपन्यास की विशेषताएँ". International Journal of Hindi Research, Vol 4, Issue 3, 2018, Pages 34-36
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