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VOL. 4, ISSUE 5 (2018)
अरुणाचल प्रदेश के गालो जनजातिय समाज में स्त्री – विमर्श
Authors
लीलि तुम्बम रीबा
Abstract
अरुणाचल प्रदेश हरे-भरे पहाड़ियों, घाटियों एवं झरनो से भरा प्रदेश है जहाँ कुल मिलकर २२ जिले है । हरेक जिले में अलग-अलग जाति-उपजाति निवास करते है जिनकी भिन्न-भिन्न बोलियॉ-उपबोलियाँ है । इन्ही जनजातियों के बहुरंगी संस्कृति तथा समृद्ध परम्पराओं एवं प्राकृतिक सुषमाओं से संपन्न अरुणाचल प्रदेश का लोकसाहित्य उन्नत और विविधपूर्ण राज्य है | यहां के लोकसाहित्य के अंतरगर्त लोकगीत, लोक कथाएँ, लोक नृत्य, कहावते और लोकोक्तियाँ आदि समाविष्ट है । और यह बात विशेष ध्यान रखने योग्य है की यहां के लोकगीतों और लोक नृत्यों की प्रस्तुति सामूहिक रूप से होते है और यह अधिकतर स्त्रियों द्वारा ही प्रस्तुत की जाती है । अधिकतर लोकगीत, लोक कथाएँ, लोक गाथायेँ, कहावते, लोकोक्तियाँ आदि स्त्रियों पर ही केंद्रित होती है ।
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Pages:39-41
How to cite this article:
लीलि तुम्बम रीबा "अरुणाचल प्रदेश के गालो जनजातिय समाज में स्त्री – विमर्श". International Journal of Hindi Research, Vol 4, Issue 5, 2018, Pages 39-41
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