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VOL. 5, ISSUE 3 (2019)
कथाकार चित्रा मुद्गल जी की कहानी संग्रह “पेंटिंग अकेली है….” में व्यक्ति संघर्ष
Authors
कृष्ण कुमार शर्मा
Abstract
किसी भी कहानी की मूलतः उत्पति व्यक्ति के जन्म से ही मानी जाती है | हिन्दी साहित्य में अनेक विधाएं हैं | ‘कहानी’ विधा का उद्गमन मुख्य रूप से भारतेन्दु जी की रचना ‘परिहंसिनी’ सन१८७५ से माना जाता है | प्रस्तुत लधु शोध-प्रबन्ध वर्तमान हिन्दी साहित्य की बहुचर्चित रचनाकार श्रीमती चित्रामुद्गल जी द्वारा रचित कहानी संग्रह ‘पेंटिंग अकेली है...’ पर आधारित है | चित्रा जी की इन कहानियों में मनुष्य के जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव और अनेकों प्रकार से जीवन के संघर्ष पूर्ण पलों को अनेकों पात्रों के माध्यम से पाठको तक बड़ी सहजता से पहुँचाया गया है | जिनमें मनुष्य न चाहते हुए भी जीवन में अनेक पहलुओं पर सदैव संघर्ष शील रहता है | कभी कर्मों के कारण तो कभी लालसा और पिपाशा की वजह से तो कभी पारिवारिक बंधन तो कभी समाज और समुदाय या फिर धार्मिक वजह अथवा फिर राजनैतिक और कभी परम्परा के वशीभूत होकर वह अपने जीवन पर्यन्त संघर्ष के जाल में घूमता रहता है क्योंकि वैसे भी कहा जाता है कि, जीवन का दूसरा नाम संघर्ष है |
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Pages:25-27
How to cite this article:
कृष्ण कुमार शर्मा "कथाकार चित्रा मुद्गल जी की कहानी संग्रह “पेंटिंग अकेली है….” में व्यक्ति संघर्ष". International Journal of Hindi Research, Vol 5, Issue 3, 2019, Pages 25-27
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