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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 5, ISSUE 3 (2019)
फसल अवशेष जलाने का वातावरण पर प्रभाव तथा उसका प्रबंधन
Authors
सुनीता यादव, संदीप कुमार, निवेता जैन, रमेश चंद हरित, शिवाधार सिंह
Abstract
देश की 40% आबादी को खिलाने के लिए कुल खाद्यान का लगभग 50% उत्पादन "इंडो गैंगेटिक प्लेन” से होता है, धान की कटाई के बाद गेहूं की फसल की बुवाई मे समय अंतराल कम होने एवं अन्य खर्च बचाने के लिए किसान फसलों की कटाई कम्बाइन हारवेस्टर से करते है इस कारण पराली खेत मे ही रह जाती है, खर्च और समय की बचत तथा खेतों को अगली फसल के लिए तैयार करने के मकसद से इन अवशेषों को आग लगा कर साफ करना किसानों को ज्यादा बेहतर विकल्प नजर आता है । जिसके कारण कई हरित गृह एवं अन्य गैसीय प्रदूषकों का उत्सर्जन होता है । जिसके फलस्वरूप मृदा एवं वायु प्रदूषण भी बढ़ जाता है ।
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Pages:01-03
How to cite this article:
सुनीता यादव, संदीप कुमार, निवेता जैन, रमेश चंद हरित, शिवाधार सिंह "फसल अवशेष जलाने का वातावरण पर प्रभाव तथा उसका प्रबंधन". International Journal of Hindi Research, Vol 5, Issue 3, 2019, Pages 01-03
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