Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 5, ISSUE 4 (2019)
नासिरा शर्मा के उपन्यास और सामाजिक बोध
Authors
डाॅ. मुरलिया शर्मा, श्रीमती प्रेमलता मीणा, डाॅ. समय सिंह मीना
Abstract
युग परिवर्तन के साथ सामाजिक परिवर्तन का वह साक्षी होता है। इसी बदलाव का सच हमें समकालीन साहित्य में देखने को मिलता है। नासिरा शर्मा जी का साहित्य भी समकालीन समाज तथा उसके अन्तर्मन को मुखरता के साथ अभिव्यक्त करता है। उनकी औपन्यासिक कृतियों के अध्ययन करते समय पाठक स्वयं उस परिवेश में खो सा जाता है। लेखिका ने हिन्दू-मुसलमान दोनों समाज के वास्तविक स्वरूप, सोच व मन्तव्य को स्पष्ट रूप से चित्रित किया है तथा पाठक को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आप और हम जो सुनते हैं, समझते है या मानते हैं, सच उससे अलग भी हो सकता है। समाज में शांति, सदाचार, समानता तथा मानवता की रक्षा के लिए हमें सदा तत्पर रहना चाहिए। नर की सेवा ही नारायण की सेवा है। जरुरतमन्दों, गरीबों, दीन-दुःखियों, अनाथों व असहायों की सेवा ही ईश्वर या अल्लाह की सच्ची सेवा है, पूजा है। सुधी पाठकों को यह समझाने के लिए अपने उपन्यासों में अक्षयवट के ज़हीर कईयाँजान के कमाल काग़ज़ की नाव के रमज़ान और दूसरी जन्नत की रुखसाना सरीख़े पात्र लेखिका ने रचे हैं। ज़हीर ‘मुस्कान’ संस्था के द्वारा अनाथ बच्चों की सेवा, पालन-पोषण, शिक्षा आदि की व्यवस्था कर, कुईयाँजान के कमाल कच्ची बस्तियों में जा-जाकर जरुरत मन्दों को निःशुल्क दवाई, खाने की वस्तुऐं, कपड़े आदि की व्यवस्था कर तथा रमज़ान असहायों की सहायता कर मानवता की रक्षा करने का संदेश देते हैं। नासिरा जी हमेशा से स्त्री-पुरुष समानता की बात करती आई हैं और यही सोच उनके उपन्यास-लेखन में हमें देखने को मिलती है। वे एक समाज की परिकल्पना करती हुई ‘शाल्मली’ की शाल्मली से कहलवाती है कि- “मेरे मन-मस्तिष्क में एक ऐसे समाज की कल्पना है, जहाँ कोई किसी का दास नहीं है, फिर एक बार मैं बता दूँ कि मैं पुरुष विरोधी न होकर अत्याचार विरोधी हूँ। अत्याचारी का कोई नाम और धर्म न हो होता, तो भी समूह या इकाई में वह हमारे सामने होता है और उसी अत्याचारी से हमें जूझना है।
Download
Pages:26-29
How to cite this article:
डाॅ. मुरलिया शर्मा, श्रीमती प्रेमलता मीणा, डाॅ. समय सिंह मीना "नासिरा शर्मा के उपन्यास और सामाजिक बोध". International Journal of Hindi Research, Vol 5, Issue 4, 2019, Pages 26-29
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.