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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 5, ISSUE 4 (2019)
अनूप अशेष के नवगीतों में समृद्यता
Authors
डाॅ0 बीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी
Abstract
अनूप अशेष के नवगीतों का अध्ययन एवं रसास्वादन करने से एक ऐसी अद्भुत अनुभूति होती है जो गीतों को नवीन कला एवं दिशा से अभिभूत रहती है -पाॅंचवे छठवें दशक के संधिकाल में जब हिन्दी कविता अनेक धाराओं ओैर वर्गो में विभाजित हो चुकी थी, तथा अनेक नामों से अभिहीत होने के कारण किसिम किसिम की हिन्दी कविता के रूप में पहचानी जाने लगी थी, ऐसे समय में अनूप अशेष ने नवगीत को सही दिशा दी इनका जन्म 07 अप्रैल सन् 1945 ई. को ग्राम सोनौरा, जिला सतना, मध्यप्रदेष मे हुआ था । इन्होनें हिन्दी से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की । ‘लौट आयेगें सगुन पंछी’ ‘वह मेरे गाॅव की हॅंसी थी’ नामक नवगीत संकलन (1980) में प्रकाषित हुआ ।
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Pages:48-50
How to cite this article:
डाॅ0 बीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी "अनूप अशेष के नवगीतों में समृद्यता". International Journal of Hindi Research, Vol 5, Issue 4, 2019, Pages 48-50
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