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VOL. 5, ISSUE 4 (2019)
रामचंद्र शुक्ल की आलोचक अंतर्दृष्टि और जायसी
Authors
डॉ. वंदना यादव
Abstract
हिन्दी साहित्य के इतिहास और आलोचना दोनों को व्यवस्था देना का कार्य आचार्य रामचंद्र शुक्ल की आलोचना दृष्टि को देना चाहिए । जिनमे उनके आलोचनात्मक प्रतिमानों ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की । लोकधर्म, विरूद्धों का सामंजस्य के साथ-साथ भक्तिकाल के संदर्भ में मानवीयता को श्रेष्ठ काव्य की कसौटी के रूप में देखना रहस्यवाद को नए संदर्भों में परखना, हिन्दी साहित्य को प्रस्थान बिन्दु मुहैया कराता है ।
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Pages:40-44
How to cite this article:
डॉ. वंदना यादव "रामचंद्र शुक्ल की आलोचक अंतर्दृष्टि और जायसी". International Journal of Hindi Research, Vol 5, Issue 4, 2019, Pages 40-44
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