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VOL. 5, ISSUE 4 (2019)
यौनकर्मी जीवन की समस्याएँ: माँ
Authors
राज बहादुर पुष्कर, डॉ. जय कौशल
Abstract
प्रस्तुत आलेख पं. विशम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ कृत ‘माँ’ उपन्यास के कथानक और उसके पात्रों के बहाने सदियों से चली आ रही स्त्री-समस्याओं को सामने लाने का प्रयास करता है। किसी भी परिवार, समाज, राष्ट्र के निर्माण स्त्रियों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। परंतु वह राष्ट्र, समाज अथवा परिवार अपने निर्मात्री स्त्रियों को बदले में क्या दे पाता है, उपन्यास के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया गया है। साहित्य निश्चित ही समाज की विसंगतियों, विद्रूपताओं को हमारे सम्मुख लाता है, ऐसे में साहित्य प्रतिनिधि के रूप में इस उपन्यास की क्या महत्ता है, यह भी समझने का प्रयास किया गया है।
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Pages:75-77
How to cite this article:
राज बहादुर पुष्कर, डॉ. जय कौशल "यौनकर्मी जीवन की समस्याएँ: माँ". International Journal of Hindi Research, Vol 5, Issue 4, 2019, Pages 75-77
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