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VOL. 6, ISSUE 2 (2020)
‘नीला चाँद’ उपन्यास: इतिहास का एक जीवन्त दस्तावेज
Authors
दुर्गा प्रसाद पटेल
Abstract
शिवप्रसाद सिंह के उपन्यास ‘नीला चाँद’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजे जाने के बाद उनका व्यास सम्मान से अलंकृत होना एक महत्त्वपूर्ण घटना सिद्ध हुई, क्योंकि यह आधुनिकता और प्रगतिशीलता दोनों की दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है । मध्यकालीन काशी का चित्रण करने के लिए उन्हें ऐसे समय का चुनाव करना था जो काशी की जनता तथा समाज को पूरी तरह भयानक उथल-पुथल से मथ दे । सबसे निचले वर्ग के सर्वबहिष्कृत चांडालों और डोमों से लेकर महिमाशाली ब्राम्हण, राजा, महाजन और सेठो को नग्न खड़ा कर दे । प्रस्तुत उपन्यास में गंगा से लेकर मंदिरों तक, आभूषणों से लेकर खाद्य पदार्थों तक, साहित्य से लेकर अध्यात्म तक, वस्त्रों से लेकर शस्त्रों तक सब का सजीव चित्रण हुआ हैं । साहित्यकारों का अपना एक दायित्व होता है । आधुनिक साहित्यकारों पर बिना कुछ कहे लेखक अपने उपन्यास के माध्यम से कहता है कि कवि मिथ्या को शाब्दिक आडंबर में पेश करने वाला एक मसखरा समझ रहा है । वह अपने को चतुर्दिक जो घट रहा है, उसे तोप-ताप कर असत्य को सुंदर पात्र में रखकर प्रस्तुत करने वाला बहरूपिया है । उपन्यास का मूल्यांकन करने के पश्चात् देखा जा सकता है कि इसका कथानक ऐतिहासिकता को समेटे हुए है, किन्तु इसे परंपरागत ऐतिहासिक उपन्यासों से हटकर भी माना जा सकता हैं ।
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Pages:01-03
How to cite this article:
दुर्गा प्रसाद पटेल "<em>‘</em>नीला<em> </em>चाँद<em>’ </em>उपन्यास: इतिहास का एक<em> </em>जीवन्त दस्तावेज". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 2, 2020, Pages 01-03
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