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VOL. 6, ISSUE 5 (2020)
वर्तमान सन्दर्भ में मनु शर्मा के पौराणिक उपन्यासों का महत्व
Authors
धर्मेन्द्र कुमार सिन्हा
Abstract
भारतीय संस्कृति में धर्म का अत्यधिक महत्व है। हमारे समाज में प्रातः काल उठकर सर्वप्रथम माता पिता गुरु एवं अग्रजों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने की परंपरा है। मनु शर्मा जी के उपन्यासों में धर्म का महत्व प्रेरणादायक रही है जैसे व्यक्तिगत धर्म, समाज धर्म, राष्ट्र धर्म, विश्व धर्म, मानव धर्म, अलौकिक धर्म, पत्नी धर्म, शिष्य धर्म का ज्ञान दैनिक जीवन में अति आवश्यक है। शर्माजी ने "कृष्ण की आत्मकथा ", "द्रोण की आत्मकथा", " गांधारी की आत्मकथा" तथा कर्ण की आत्मकथा में माता-पिता के प्रति श्रद्धा तथा गुरु जनों के प्रति विनम्रता युक्त श्रद्धा अभिवादन तथा सेवा भाव दिखाई देता है। इनके अधिकांश प्रमुख पात्र अपने माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान करते हैं। कृष्ण तो नंद बाबा, मामा कंस, गुरुजनों सभी के चरण स्पर्श करते हैं। यहाँ तक कि जब युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में आए सभी अतिथियों के पाँव धोने का काम भी स्वयं करने लगते हैं। इस प्रकार यह देखा जाता है कि मनु शर्मा जी ने पौराणिक उपन्यासों में अनेक स्थलों पर मित्र,अतिथि और राजपुत्रों के आगमन पर होने वाली स्वागत की औपचारिकताओं का विस्तृत वर्णन किया है।
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Pages:24-26
How to cite this article:
धर्मेन्द्र कुमार सिन्हा "वर्तमान सन्दर्भ में मनु शर्मा के पौराणिक उपन्यासों का महत्व". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 5, 2020, Pages 24-26
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