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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 6, ISSUE 5 (2020)
गबन में राष्ट्रीय आंदोलन
Authors
अंशुमाला
Abstract
प्रेमचंद की यह औपन्यासिक कृति गबन सन् 1931 में प्रकाशित हुई। यह समय भारतीय स्वाधीनता आंदोलन का वह काल था जब सम्पूर्ण देश स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु आंदोलित था। 20 मार्च 1929 को मेरठ षडयंत्र केस द्वारा पूरे देश में अंग्रेजी सरकार द्वारा गिरप्तारियाँ हुई थीं। देष में उत्पन्न क्रांतिकारी चेतना को दबाने के लिए यह अंग्रेजी साम्राज्यवाद की धृष्टतापूर्ण नीति थी। प्रेमचंद जैसे सजग कलाकार का इस घटना से अछूता रहना असम्भव था। अमृतराय का यह कहना कि श्उपन्यास जिस रंग में शुरू हुआ था, शायद उसी रंग में खत्म भी हो जाता। लेकिन हो नहीं सका। उन्हीं दिनों मेरठ खडयंत्र केस चल पड़ा। गबन का उत्तरार्द्ध पूरे का परा क्रांतिकारिया के खिलाफ पुलिस के झूठे केस की दास्तान है। अतः इसका प्रमाण है गबन की कथा का इलाहाबाद से कलकत्ते आना एक मध्यवर्गीय परिवार का राष्ट्रीय आंदोलन से संबद्धता को दर्षाता है।
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Pages:123-125
How to cite this article:
अंशुमाला "गबन में राष्ट्रीय आंदोलन". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 5, 2020, Pages 123-125
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