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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 6, ISSUE 5 (2020)
सामाजिक-आर्थिक स्थिति के परिप्रेक्ष्य में मानवी बीमारियां: एक अध्ययन
Authors
सुभाष भिमराव दोंदे
Abstract
औद्योगिकरण के पश्चात स्थानीय से वैश्विक स्तर पर विभाजित संपन्न और असंपन्न समाज में बीमारियां भी विभक्त हो गयी है। गरीबी के हिस्से में कुपोषण एवं संक्रामक बीमारियां; तो अमीरी एवं संपन्नों के हिस्से में जीवन-शैली के तनाव से जुड़ी चयापचयी सिन्ड्रोम जैसी गैर-संक्रामक बीमारियां आयी है। दोनों समाज की समस्याएँ काफी हद तक भिन्न होने के बावजूद मौलिक स्तर पर, कुछ समस्याएं एक समान हैं- जैसे रुग्णता की पीड़ा, विकलांगता, समय से पहले मृत्यु एवं मानव शोषण। सुख और सकारात्मक स्वास्थ्य प्राप्त करके दीर्घायु सुनिश्चित करने हेतु और जीवन-शैली तनाव के साथ व्यावसायिक थकान का मुकाबला और मनोदैहिक बीमारियों की रोकथाम यह संपन्नों की प्रिस्क्रिप्शन हो सकती है। किन्तु असंपन्नों में गरीबी और बीमारियां दोनों एक दूसरे को प्रभावित करती है। मलेरिया, टीबी, एड्स जैसी संक्रामक बीमारीयां आर्थिक विकास को प्रभावित करती है। दुनिया भर में बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य ख़र्चे के कारण हर साल, 150 मिलियन लोग वित्तीय तबाही का सामना करते हैं; जिसकी, एक तिहाई से अधिक उत्पीड़ित आबादी भारत में रहती हैं। स्वास्थ्य व्यय के कारण गरीबी-रेखा से नीचे गिरने वाले भारतीयों की संख्या 63 मिलियन है; जो देश की आबादी का लगभग 7% हिस्सा है। बढ़ती हुई महंगाई या मुद्रास्फीति दर या गरीबी और बीमारियों का इलाज नही करने की घटनाएं इस मे सांख्यिकीय स्तर गहरा नकारात्मक सहसंबंध है। इसके अलावा बीमारियों से मृत्युदर और गरीबी के बीच में इसी तरह का सह-संबंध देखा गया है। प्रस्तुत लेख में संपन्न और असंपन्नों में विभाजित समाज के बीमारियों का सामाजिक-अर्थिक स्थिति के परिपेक्ष्य में समीक्षात्मक विश्लेषण किया गया है।
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Pages:131-133
How to cite this article:
सुभाष भिमराव दोंदे "सामाजिक-आर्थिक स्थिति के परिप्रेक्ष्य में मानवी बीमारियां: एक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 5, 2020, Pages 131-133
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