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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 6, ISSUE 5 (2020)
काषी के अस्सी में आँचलिकता
Authors
संजय प्रसाद
Abstract
भूमंडलीकरण और बाजार वाद की राजनीति ने देश में देर से दस्तक दी, बनारस में बाजारवाद का चेहरा बहुत पहले से मौजूद है। यह उपन्यास अपने इतिवृति और व्यंग्यार्थ की बदौलत इक्कीसवीं सदी के मुहाने पर दस्तक देती बीसवीं सदी के आखिरी दो दशकों का महा आख्यान उपस्थित करता है। इसके कथ्य एवं शिल्प की खूबियों एवं खामियों को सरल समीक्षा पद्धति के जरिए नहीं समझा जा सकता। काषी की महाष्मशान स्थल माना जाता है जिसका राजा डोम था। ऐसा बलशाली की राजा हरिष्चन्द्र की भी उन्होंने अपना नौकर रखा था। काषी धर्म और मोक्ष का स्थल भी मानी जाती है। इनकी महानता को देखने और सुनने के लिए हजारों के तादाद में विदेशी बनारस आते है।
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Pages:109-111
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संजय प्रसाद "काषी के अस्सी में आँचलिकता". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 5, 2020, Pages 109-111
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