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VOL. 6, ISSUE 5 (2020)
प्रेमचंद की कहानियों में बाल-चरित्र और तद्युगीन भारती समाज
Authors
शशि प्रभा
Abstract
प्रेमचंद का संपूर्ण साहित्य तद्युगीन भारतीय समाज का जीवंत इतिहास है। उन्होंने अपनी रचनाओं में समाज का यथार्थ रखा हैं यूँ तो उन्होंने समाज के सभी वर्गों-समुदायों को अपना पात्र बनाया पर उन्हें सर्वाधिक सफलता मिली है- ‘बाल-चरित्र’ के निर्माण में। प्रेमचंद ने अपनी कई कहानियों में बाल-पात्र को ही नायक बनाया है तथा उसी के माध्यम से अपने भाव को प्रकट किये हैं। प्रेमचंद की लगभग सभी कहानियों के बाल-चरित्र में प्रेमचंद के स्वयं का जीवन झलक मारता नजर आता है। उन्होंने जिस तरह के अभावों-विपन्नताओं को झेला था, उसका प्रत्यक्ष रूप उनके बाल-चरित्र में परिलक्षित होते हैं। उनके सभी बाल-चरित्र उस समय के समाज के अनुरूप सृजित हुए हैं। यही उनकी सबसे बड़ी रचनात्मक सफलता है।
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Pages:143-147
How to cite this article:
शशि प्रभा "प्रेमचंद की कहानियों में बाल-चरित्र और तद्युगीन भारती समाज". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 5, 2020, Pages 143-147
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