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VOL. 6, ISSUE 6 (2020)
मिथिला में साधना का स्वरूप
Authors
डाॅ॰ शंकर शरण प्रसाद
Abstract
शृंगार की परिणति भक्ति के रूप में होती है। ईश्वरोन्मुख रति के द्वारा भक्ति रस की अभिव्यक्ति होती हैं। श्रीकृष्ण की बाल्य तथा कैषोर लीलाओं का वर्णन ही ब्रजभाषा के कवियों ने किया है। संयोग तथा वियोग इन उभय स्थितियों से पूर्ण कृष्ण के लीलामृत का आस्वादन अतीव आह्दाकारी प्रतीत होता है। मिथिला में काली उपासना की परम्परा परिलक्षित होती है। मिथिला माहात्मय के अनुसार मिथिला शब्द के तीन वर्ण म, थ तथा ल क्रमषः ब्रह्मा, विष्णु तथा रूद्र के वाचक है।
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Pages:21-22
How to cite this article:
डाॅ॰ शंकर शरण प्रसाद "मिथिला में साधना का स्वरूप". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 6, 2020, Pages 21-22
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