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VOL. 7, ISSUE 1 (2021)
समाजिक परिपे्रक्ष्य में-मानस प्रयोजन
Authors
डाॅ. ऊषा तिवारी
Abstract
मेरे प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में रामचरित मानस का समाज में मूल्य एवं प्रयोजन को सामाजिक धरातल पर व्यक्त करना है। क्यांेकि समाज में जो भ्रष्टाचार एवं अमानुषि प्रवत्ति का चलन बड़े जोरों से चल रहा है। उसके लिए हिन्दी जगत में मानस ही एक ऐसा पड़ाव है जिसकी छत्रछाया से बहुत सी त्रुटियों को समाज से महज काँटे की तरह निकालकर फेंका जा सकता है। राम एक ऐसे अवतार के रूप में पृथ्वी में आए जो समाज की प्रत्येक गतिविधि में चारित्रक रूप से प्रेरणास्वरूप आदर्शवादी व्यक्तित्व की अतुलनीय धरोहर बनकर सर्वोपरि स्थान ग्रहण किया है। उन्होंने मानव मस्तिष्क को नित्य पारिवारिक घटनाओं तथा संघर्षशील जीवन जीने का समाज मंे एक अटल उद्देश्य स्थापित किया है।
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Pages:56-57
How to cite this article:
डाॅ. ऊषा तिवारी "समाजिक परिपे्रक्ष्य में-मानस प्रयोजन". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 1, 2021, Pages 56-57
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