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VOL. 7, ISSUE 1 (2021)
राजेन्द्र यादवः एवं मनोविज्ञान
Authors
डाॅ. आशुतोष कुमार द्विवेदी, अंजना सिंह
Abstract
साहित्य के क्षेत्र में राजेन्द्र यादव महत्वपूर्ण रचनाकार के रुप में जाने जाते हैं। लेखन की दिशा में तो उनका अपना अलग मुकाम है ही बल्कि सामान्यतः लोक-व्यवहार के लिए भी उनकी प्रतिभा का बहुत लोहा माना जाता है। मानसिक स्थिति का जिस कुशलता से उन्होंने अपने साहित्य में वर्णन किया है, उसका प्रभाव उनकी रचनाओं में स्पष्टतः परिलक्षित होता हैै। वे बिल्कुल साफ-सुथरी भाषा का प्रयोग करने तथा भावनाओं को खुलकर लिखने में विश्वास रखने वाले लेखकों में आते हैं। जिस तथ्य को व्यक्ति तोड़ मरोड़कर कहता है उस बात को सीधे शब्दों में कहने का हुनर उन्हीं जैसे कुशल कलमकार के पास था-‘‘हर व्यक्ति की जिन्दगी में, विशेषकर रचनाकार की जिन्दगी में, सैक्स का बड़ा हांथ होता है,कई मनोविश्लेषक तो यह मानते हैं कि रचनात्मकता अभिव्यक्ति के स्तर पर जैसे कला के साथ जुड़ी है, तो उधर स्त्रोत के रुप में सैक्स के साथ भी जुड़ी हुई है गगगग रचना कभी सैल्फ-प्रोजेक्शन से आती है तो कभी-कभी गिल्ट से आती है गगगगग लेखन में अवचेतन का भी महत्वपूर्ण हाथ होता हैै।’’1 उनकी यही बेबाक वाणी सिद्ध करती है कि लेखक की रचनात्मकता को मनोविश्लेषण के परिप्रेक्ष्य में देखने वाले तथा अपने रचना संसार में मनोविज्ञान से सम्बन्धित शब्दावली का एवं सिद्धान्तों का प्रयोग करने वाले, आन्तरिक संवादों में मातहत् पात्रों की जिज्ञासा को भलिभाति प्रस्तुत करने में राजेन्द्र यादव का तथाकथित सामाजिक रचनाकारों में प्रथमतः नाम लिया जाता है।
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Pages:53-55
How to cite this article:
डाॅ. आशुतोष कुमार द्विवेदी, अंजना सिंह "राजेन्द्र यादवः एवं मनोविज्ञान". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 1, 2021, Pages 53-55
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