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VOL. 7, ISSUE 1 (2021)
हिंदी उपन्यासों में अभिव्यक्त कृषक जीवन की चुनौतियाँ
Authors
संदीप त्रिपाठी
Abstract
भारत एक कृषि प्रधान देश है इसका पूरा श्रेय उन लोगों को जाता है, जो दिनभर कड़े परिश्रम के साथ धूप, गर्मी, बरसात की परवाह किये बिना खेतों में अनाज का उत्पादन करते है। इसलिए ही इन लोगों को हमारे देश में किसान और अन्नदाता कहा जाता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने किसानों को भारत की आत्मा कहा था। लेकिन किसानों की अनदेखी कर विकास को स्थायित्व प्रदान करने की कल्पना नहीं की जा सकती। आज भी देश की कुल जनसंख्या का एक बड़ा भाग कृषि पर आश्रित है। पिछले कुछ दशकों में, अर्थव्यवस्था के विकास में मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों का योगदान तेजी से बढ़ा है, वहीँ कृषि क्षेत्र के योगदान में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए सरकार को कृषि क्षेत्र की मजबूती के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की आवयश्कता है। सरकार ने 2023 तक देश के किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को ठोस कार्य योजना से ही प्राप्त किया जा सकता है।
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Pages:27-29
How to cite this article:
संदीप त्रिपाठी "हिंदी उपन्यासों में अभिव्यक्त कृषक जीवन की चुनौतियाँ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 1, 2021, Pages 27-29
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