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VOL. 7, ISSUE 1 (2021)
मधुकर सिंह की कहानियों में निहित यथास्थितिपरक संघर्ष का स्वरूप
Authors
सगीर अहमद, डॉ. अजय कुमार
Abstract
मधुकर सिंह की कहानियों में जहां एक तरफ शोषण, भ्रष्टाचार तथा संघर्ष के प्रमुख बिंदु मुखर हुए हैं वहीं दूसरी तरफ इसके निराकरण के रास्ते भी दिखाए गए हैं। किसानों को पर्याप्त सुविधाएं दिलाने के लिए मधुकर सिंह कहीं ‘कृषक समाज संगठन’ की बात करते हैं तो कहीं-कहीं शोषण से मुक्ति के लिए जमींदारों के खिलाफ जातीय संगठन के निर्माण का भाव जगाते हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो मधुकर सिंह की यथास्थितिपरक संघर्ष का आईना दिखाती कहानियां यथार्थोंमुख तथा भविष्योन्मुख समाज का चित्रण करती हैं।
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Pages:30-31
How to cite this article:
सगीर अहमद, डॉ. अजय कुमार "मधुकर सिंह की कहानियों में निहित यथास्थितिपरक संघर्ष का स्वरूप". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 1, 2021, Pages 30-31
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