ARCHIVES
VOL. 7, ISSUE 1 (2021)
वैदिक साहित्य में संयुक्त परिवार की अवधारणा एवं वर्तमान की आवश्यकता
Authors
कु. राखी वशिष्ठ
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र में ‘‘वैदिक साहित्य में संयुक्त परिवार की अवधारणा एवं वर्तमान की आवश्यकता’’ का विवरण प्रस्तुत किया गया है। परिवार सामाजिक संरचना की मूलभूत इकाई है, वर्तमान समय में संयुक्त परिवार के पारम्परिक रूप में काफी परिवर्तन आया है। व्यक्तिगत सोच और स्वतंत्र जीवन जीने की चाहत ने पारिवारिक सम्बन्धों के महत्व को कम कर दिया है। बुजुर्ग पीढ़ी और युवा पीढ़ी की सोच में बहुत अन्तराल आ गया है। जो पारिवारिक सम्बन्धों में पैदा हुए तनाव का एक बहुत बड़ा कारण है, जिसके कारण संयुक्त परिवार बिखरते जा रहे हैं। पारिवारिक भावना कम होती जा रही है। वैदिक साहित्य मावव जीवन का मार्गदर्शन करता है। वेद वह ईश्वरीय ज्ञान है जो सृष्टि के प्रारम्भ से मानव कल्याण के लिए ऋषि मुनियों के माध्यम से प्रदान किया गया है, वेद ही विश्वशान्ति और विश्व कल्याण के प्रथम उद्घोषक है। इस शोध-पत्र में वैदिक साहित्य में पारिवारिक भावना को स्पष्ट किया गया है।
Download
Pages:44-45
How to cite this article:
कु. राखी वशिष्ठ "वैदिक साहित्य में संयुक्त परिवार की अवधारणा एवं वर्तमान की आवश्यकता". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 1, 2021, Pages 44-45
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

