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VOL. 7, ISSUE 1 (2021)
गोस्वामी तुलसीदासः व्यक्तित्त्व और कृतित्त्व’
Authors
अन्नू शर्मा, नवनीता भाटिया
Abstract
हिन्दी साहित्य के सम्पूर्ण इतिहास में सर्वाधिक विवादास्पद और लोकप्रिय रचनाकार यदि ‘तुलसीदास’ को कहा जाए तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। तुलसीदास जी का जीवन और साहित्य, तत्कालीन विद्वजनों से आधुनिक बौद्धिक रचनाकारों तक की आलोचना के केन्द्र में रहा है। हिन्दी के लगभग हर बड़े रचनाकार और आलोचक ने ‘तुलसी’ पर चर्चा की है। जहाँ एक ओर रामचन्द्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामविलास शर्मा, निराला व विश्वनाथ त्रिपाठी जैसे विचारकों ने तुलसीदास जी को हिन्दी का अद्वितीय कवि माना है तो वहीं राजेन्द्र यादव, मुक्तिबोध, रांगेय राघव जैसे विचारकों द्वारा तुलसीदास का विरोध भी हुआ है। खंडन-मंडन करने की इस पूरी प्रक्रिया में ‘गोस्वामी तुलसीदास’ पर निरन्तर मंथन हुए किन्तु उनकी लोकप्रियता तनिक भी बाधित नहीं हुई। गोस्वामी तुलसीदास जी की लोकप्रियता देश व काल की सीमाओं से परे है। मॉरीशस, फिजि, अफ्रीका, इण्डोनेशिया, बर्मा जहाँ-जहाँ भारतीयों की कर्मभूमि बनीं, वहीं तुलसी की रामकथा भी रच-बस गई। तुलसीदास जी का साहित्य शास्त्र सम्मत होने के साथ ही लोक सम्मत भी है। इसी कारण विद्वान से विद्वान व्यक्ति को तुलसी के साहित्य में ज्ञान का अतुल्य भण्डार मिल जाता है और वहीं अनपढ़ और सामान्य ज्ञान-बोध वाली जनता को भी तृप्त करने में तुलसी का साहित्य सक्षम है।
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Pages:86-88
How to cite this article:
अन्नू शर्मा, नवनीता भाटिया "गोस्वामी तुलसीदासः व्यक्तित्त्व और कृतित्त्व’". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 1, 2021, Pages 86-88
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