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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
मैना के संघर्ष का धारावाहिक – ‘धार’
Authors
डॉ. मिनी जोर्ज
Abstract
हिन्दी कथा साहित्य की वर्तमान पीढी में नई भाव भूमि को लेकर उभरे कथाकारों में राम संजीव प्रसाद अपनी अलग पहचान रखते हैं। संजीव का सन् 1990 ईं में प्रकाशित धार उपन्यास आदिवासी उपन्यास के इनिहास में एक नई उपलब्धि माना जा सकता है। बिहार के सथ्थाल परगना के कोयला क्षेत्र के शोषित जीवन की त्रासदी और उनकी रचनात्मक संघर्ष गाथा को उपन्यासकार ने इस उपन्यास में व्यापक फलक पर परिभाषित किया है। उपन्यास के आदि से अन्त तक दलित शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाती रही मैना दलित नारी की विद्रोही चेतना का प्रतीक है। व्यवस्था व पूँजीपतियोंसे शोषित अपने व अपने समाज केलिए लडाई करती मैना की कुर्बानी अन्याय के विरुद्ध के संघर्ष के धारावाहिक की कुर्बानी नहीं है बल्कि शोषण के देर के नीचे दबी यह विद्रोह रूपी चिनगारी, दलितों की वैचारिक क्रान्ति को धधकनेवाली ही है।
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Pages:01-07
How to cite this article:
डॉ. मिनी जोर्ज "मैना के संघर्ष का धारावाहिक – ‘धार’ ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 01-07
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