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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
आर्द्रभूमि: रामसर कन्वेंशन एवं आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) अधिनियम 2017 के परिपेक्ष्य में
Authors
डॉ सुभाष भिमराव दोंदे
Abstract
आर्द्रभूमियों द्वारा प्रदान किए जाने वाले कई लाभ और सेवाएं सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के लिए आवश्यक हैं। रामसर कन्वेंशन की चौथी रणनीतिक योजना चार व्यापक लक्ष्यों और 19 विशिष्ट उपलक्ष्यों की पहचान करती है, जो एसडीजी की उपलब्धि के साथ-साथ जैविक विविधता कन्वेंशन द्वारा स्थापित किए गए लक्ष्य का सीधे समर्थन करती हैं। वैश्विक आर्द्रभूमि संरक्षण और पुनःप्रचलन को मजबूत करने के लिए स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय कार्यों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए लगातार काम करना अनिवार्य है, ताकि आर्द्रभूमि प्रबंधन योजनाओं का कार्यान्वयन अधिक प्रभावी एवं कारगर ढंग से हो सके। इसे प्रबंधन, नीति, निगरानी, पुनःप्रचलन, ज्ञान और निधीकरण इन पांच अन्योन्याश्रित पहलुओं में किया जा सकता है। आर्द्रभूमियों के ज्ञानपूर्ण एवं स्थायी उपयोग के लिए रामसर कन्वेंशन इस विश्व के प्रथम पर्यावरण संधि को पांच दशक पूरे हुए किंतु राष्ट्र के स्तर पर सुसंगत अधिनियम एक दशक पूर्व ही बने है; जो आज तक केवल कागज पर ही रहे है। प्रस्तुत लेख में आर्द्रभूमि के समस्त पहलुओं की अनुसंधान से मिली सूचना के आधार पर रामसर संधि-पत्र (कन्वेंशन) एवं आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) अधिनियम 2017 के परिप्रेक्ष्य में समीक्षात्मक विश्लेषण किया है।
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Pages:23-28
How to cite this article:
डॉ सुभाष भिमराव दोंदे "आर्द्रभूमि: रामसर कन्वेंशन एवं आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) अधिनियम 2017 के परिपेक्ष्य में ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 23-28
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