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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
अनुभूति के विविध रुप और साहित्य
Authors
अनिल कुमार सिंह
Abstract
इसमें कोई दो राय नहीं कि अनुभूति कला और साहित्य का मूल अवयव है। साहित्य में अनुभूति के विविध रूपों की पहचान और उसके स्वरुप का विवेचन बहुत पहले से किया जाता रहा है, जिसका मूल क्षेत्र सौन्दर्यानुभूति और रसानुभूति था। हम यह भी जानना चाहते हैं कि इधर हाल के दिनों में अनुभूति को जीवन के सामान्य अनुभूतियों से तुलना करते हुए जो नए अध्ययन और चिंतनों का सूत्रपात किया गया है, उसकी दिशा क्या है? इस शोध आलेख में उन्हीं को आधार बनाया गया है और यह जानने का प्रयास किया गया है कि
- जीवन के सामान्य अनुभूति से सौन्दर्यानुभूति भिन्न कैसे है ?
- कला और विज्ञान जगत की अनुभूति का स्वरुप क्या है ?
- अनुभूति की व्यापक सत्ता का क्या तात्पर्य है ?
- उत्तर आधुनिक विमर्श में अनुभूति संबंधी मान्यताएं क्या हैं?
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Pages:96-100
How to cite this article:
अनिल कुमार सिंह "अनुभूति के विविध रुप और साहित्य ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 96-100
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