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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
जन कवि नागार्जुन और उनका काव्य
Authors
ज्योत्स्ना आनंद
Abstract
आलेख का ध्येय जनवादी कविता के दौर के उन्मुक्त कवि नागार्जुन (वैद्यनाथ मिश्र) के काव्य के विभिन्न आयामों की पड़ताल करना है। नागार्जुन की कविता सचेत पाठक के मन और समाज को संस्कारित करती है। जीवन का संघर्ष ही नागार्जुन के काव्य की जलवायु है। नागार्जुन ही एकमात्र कवि हैं जिन्होंने साहित्यिक गलियारों में सामाजिक- राजनीतिक व्यंग्य को आधार बनाकर वीभत्स को भी नवीन शक्ति प्रदान की है। शोध- आलेख के माध्यम से नागार्जुन के काव्य में वर्णित प्रेम, प्रकृति, व्यंग्य, समाज एवं राजनीति इत्यादि को जीवंत अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया गया है।
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Pages:162-163
How to cite this article:
ज्योत्स्ना आनंद "जन कवि नागार्जुन और उनका काव्य". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 162-163
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