Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 7, ISSUE 5 (2021)
जनवादी एवं प्रतिबद्धता के रचनाकार संजीवः नारी पात्रों के विशेष संदर्भ में
Authors
डॉ. वर्षा खरे, राजेश कुमार वर्मा
Abstract
समाज में जो परिवर्तन होते हेैं, उन पर साहित्यकारों की पैनी नजर होती है। जिसके कारण वह अपनी कलम को एक नयी भावभुमि पर अवतरित कर पाने में सफलता हासिल कर पाते हैं। संजीव ने जो विडम्बना अपने आस-पास में घटती हुई देखी जिसे स्वयं भोगा उसका आकलन अपनी कथा में किया है। इसी कारण उनके साहित्य में संस्कृति, यथार्थ, आदिवासी जीवन, विज्ञान, की जो परिणति मिलती है उसका कारण मात्र यही है कि वह उन सभी परिस्थितियों को देख और समझ चुके हैं। इस आलेख में मैंने संजीव के कथा साहित्य में नारी जीवन की विडम्बनाओं का गहराई से अवलोकन करने के पश्चात् ही उसको अपने आलेख में समाहित किया है। संजीव जैसे कलाकार विरले ही साहित्य में अपनी अभिव्यक्ति को खुलकर कहने में सक्षम होते हैं। नारी जीवन की विपदा को अपनी कहानी और उपन्यासों दोनों में उन्होंने प्रदर्शित किया है। जिसका संक्षिप्त विवरण मैंने अपने आलेख में किया है।
Download
Pages:1-3
How to cite this article:
डॉ. वर्षा खरे, राजेश कुमार वर्मा "जनवादी एवं प्रतिबद्धता के रचनाकार संजीवः नारी पात्रों के विशेष संदर्भ में ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 5, 2021, Pages 1-3
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.