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VOL. 7, ISSUE 5 (2021)
उच्च-शिक्षा के क्षेत्र में कोरोना के दुष्प्रभाव
Authors
डाॅ. गायत्री शर्मा
Abstract
चीन के वुहान से निकलकर दुनिया के कोने-कोने में तबाही मचाने वाला कोरोना वायरस पौराणिक कथाओं के किसी दानव से कम नहीं है। कोविड-19 वायरस के रूप में यह एक ऐसा महादानव है, जिसके आगे अत्याधुनिक चिकित्सा तंत्र भी हार मानता सा प्रतीत होता है। देश और दुनिया की रफ्तार पर ब्रेक लगाने वाले कोरोना ने चिकित्सा तंत्र के साथ ही देश के उच्च शिक्षा-तंत्र के लिए भी अनगिनत चुनौतियों का अंबार खड़ा कर दिया है। कोरोना संक्रमण दर बढ़ने का काल शिक्षकों व छात्रों दोनों के लिए इंतजार व मुश्किलों का वो लंबा दौर था, जो आज भी जारी है। शैक्षणिक सत्र के आरंभ में छात्रों से गुलज़ार रहने वाले काॅलेज परिसर आज टकटकी लगाए छात्रों की चहलकदमी का इंतजार कर रहे है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कोरोना से उपजी चुनौतियों ने नवीनतम तकनीक के रूप में जहां हमें निराशा में भी आशा व उम्मीद की राह दिखाई है, वहीं इन तकनीकों के दुष्परिणामों के फलस्वरूप हम कई प्रकार कीे शारीरिक व मानसिक रूग्णता के भी शिकार भी हो गए है।
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Pages:36-38
How to cite this article:
डाॅ. गायत्री शर्मा "उच्च-शिक्षा के क्षेत्र में कोरोना के दुष्प्रभाव ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 5, 2021, Pages 36-38
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