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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 5 (2021)
कश्मीर की संस्कृति संदर्भः इकबाल
Authors
नीलम कुमारी
Abstract
संस्कृति जीवन की विधि है। समाज तथा संस्कृति के साथ समान रूप से सम्बन्ध है। समाज के नैतिक, चारित्रिक एवं व्यावहारिक आदर्षों की झलक संस्कृति में मिलती है। संस्कृति संपूर्ण मानवीय इतिहास का सार है क्योंकि इसमें समाज के संपूर्ण गुणों के इतिहास का निचोड़ सम्मिलित होता है। किसी देष की संस्कृति वहां के विचार, धर्म, दर्षन, काव्य संगीत, नृत्य कला, खान-पान, रीति-रिवाज, भाषा आदि में झलकती है। भारतीय संस्कृति अनेक संस्कृतियों का मिश्रण है। भारत का अभिन्न अंग होते हुए भी कष्मीर अपनी संस्कृति में विषिष्ट है। कष्मीर की संस्कृति का आषय कष्मीर की संस्कृति एवं परम्पराओं से है। कष्मीर की संस्कृति में बहुरंगी मिश्रण है, जिसे सम्मिलित रूप से कष्मीरियत के नाम से जाना जाता है। जयश्री रॉय के उपन्यास ‘इकबाल’ में लेखिका ने कष्मीर की संस्कृति का वर्णन किया है। कष्मीर अपने प्राकृतिक भौगोलिक सौन्दर्य के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है। वह हिन्दू, मुस्लिम, सिख और बौद्ध दर्षन एक साथ मिलकर एक समग्र संस्कृति की रचना करते हैं। ‘कष्मीर’ भारत देष का ऐसा खूबसूरत टुकड़ा है जहाँ जाना सब का सपना होता है। हर कोई एक बार वहां जाना चाहता है। भारत के अन्य प्रदेषों से सांस्कृतिक दृष्टि से भिन्न है।
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Pages:64-65
How to cite this article:
नीलम कुमारी "कश्मीर की संस्कृति संदर्भः इकबाल ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 5, 2021, Pages 64-65
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